पलायन - मार्ग
(ESCAPE-ROUTE)
नफ़रत की तेज़ आग भड़कने लगी है फिर
फिर कुछ दिनों से मुल्क का माहौल गर्म है
इन्सान का जूनून है इन्सानियत की मौत
चीख़ ओ पुकार जिसकी भी हो सबकी शर्म है
मन्दिर को तोड़ा जाए या मस्जिद जलाई जाए
नुक़सान आदमी का है कब मरता धर्म है
मन्दिर बचाने के लिए पूजा नहीं बहुत
मस्जिद बचाने के लिए काफ़ी नहीं नमाज़
फिर क्यों न अपने वहम को ही मार डालिए