यहाँ नहीं तो कहाँ मिलेंगे
बचा नहीं पाया आख़िर
बह निकला था ज़्यादा ख़ून
ग़ुस्से में कहती तो थी
कर सकती है लगा नहीं
आज से तेरा किसी से मिलना
बाहर आना - जाना बंद
कहते वक़्त न सोंचा था
ना - मुमकिन की हद तक मुश्किल होता है
उस की हिफ़ाज़त कर पाना
जो अपना ही दुश्मन हो